3 सितंबर 2020 - 14:23
रूस के साथ नया रणनीतिक गठबंधन बनाने की चीन की पेशकश, भारत और अमरीका के लिए ख़तरे की घंटी

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का कहना है कि दूसरे विश्व युद्ध की जीत को मज़बूती से बचाने और दुनिया में न्याय और निष्पक्षता की रक्षा के लिए चीन, रूस के साथ काम करने के लिए तैयार है।

गुरुवार को दूसरे विश्व युद्ध की जीत की 75वीं वर्षगांठ के जश्न के अवसर पर चीनी राष्ट्रपति शी ने अपने रूसी समकक्ष पुतिन के साथ संदेशों के आदान-प्रदान के दौरान यह टिप्पणी की।  

उन्होंने कहा कि चीन और रूस ने दूसरे विश्व युद्ध में जीत हासिल करने के लिए ऐतिहासिक योगदान दिया और बड़ी क़ुर्बानियां पेश कीं, और अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाईयों तक ले जाने के लिए ठोस आधार तैयार किया है।

चीन के राष्ट्रपति का कहना था कि दूसरे विश्व युद्ध की जीत की 75वीं वर्षगांठ को एक अवसर समझकर वह राष्ट्रपति पुतिन के साथ काम करने के लिए तैयार हैं, ताकि दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग और अधिक मज़बूत किया जा सके।

चीन के राष्ट्रपति की रूस के साथ रणनीतिक संबंधों को अधिक मज़बूत करने की पेशकश को विश्व में तेज़ी से बदलते शक्ति के संतुलन और नए समीकरणों के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमरीका का मुख्य प्रतिद्वंद्वी पूर्व सोवियत संघ था, जिसका स्थान अब चीन ले रहा है, इसलिए हर स्तर पर दोनों देशों के बीच कड़ा मुक़ाबला जारी है, जिसे विशेषज्ञ एक नए शीत युद्ध की शुरूआत का नाम दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में रूस जैसे शक्तिशाली देश को रणनीतिक साझेदारी और व्यापक सहयोग की चीनी राष्ट्रपति की पेशकश, स्पष्ट रूप से अमरीका विरोधी गठबंधन को मज़बूती प्रदान करने के लिए है।

इस बीच, बीजिंग और नई दिल्ली के बीच जारी तनाव में जहां भारत, अमरीका से भरपूर सहयोग की उम्मीद कर रहा है, वहीं चीन ने रूस के साथ अपना सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है।

चीन अब इस रणनीतिक सहयोग को सिर्फ़ क्षेत्र तक सीमित नहीं रखता चाहता है, बल्कि उसकी इच्छा है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी बीजिंग और मास्को मिलकर वैश्विक भूमिका अदा करें।

चीन के राष्ट्रपति का कहना था कि दोनों ही देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं, इसलिए वैश्विक विकास और विश्व शांति में महत्वपूर्ण संयुक्त भूमिका निभा सकते हैं।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने शी की इस पेशकश का स्वागत करते हुए कहा है कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के रूप में रूस और चीन को वैश्विक शांति और विकास की सुरक्षा अपना पूरा योगदान देना चाहिए।